मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए हरी खाद पर जोर: किसानों को 50% अनुदान पर मिलेंगे बीज
उत्तर प्रदेश में किसानों को मृदा स्वास्थ्य सुधारने और उत्पादन बढ़ाने के लिए हरी खाद (Green Manure) के प्रयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद का अधिक से अधिक उपयोग करें।
🌱 क्यों जरूरी है हरी खाद?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार:
- 📉 वर्तमान में मिट्टी में जीवांश कार्बन मात्र 0.2–0.3% रह गया है
- 🎯 इसे बढ़ाकर 0.8–1% तक करना आवश्यक है
- ⚠️ अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों (यूरिया, DAP) के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता घट रही है
हरी खाद के प्रयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थ, सूक्ष्म जीव और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है।
🌾 कौन-कौन सी फसलें हैं उपयोगी?
हरी खाद के लिए किसान निम्न फसलों का उपयोग कर सकते हैं:
- 🌿 ढैंचा
- 🌿 सनई
- 🌿 लोबिया
- 🌿 ग्वार
- 🌿 मक्का
👉 इन फसलों को 30–40 दिन बाद मिट्टी में पलट देना चाहिए, जिससे नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है।
🌍 क्या होंगे फायदे?
हरी खाद के प्रयोग से:
- ✅ मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी
- ✅ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की उपलब्धता बढ़ेगी
- ✅ सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ेगी
- ✅ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी
- ✅ खेती की लागत में कमी आएगी
☀️ गर्मी में हरी खाद का महत्व
अप्रैल और मई की गर्मी में:
- 🌾 खेतों को हरी खाद से ढकने पर ऊसर भूमि बनने का खतरा कम होता है
- 🌱 अगली फसल के लिए भूमि बेहतर तैयार होती है
💰 किसानों के लिए सरकारी सहायता
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए:
- 🌿 ढैंचा और मिश्रित हरी खाद के बीज
- 💸 50% अनुदान (Subsidy) पर उपलब्ध कराएगा
📌 किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कर इन बीजों का लाभ उठा सकते हैं।
🌟 निष्कर्ष
हरी खाद का उपयोग न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि सस्टेनेबल खेती (Sustainable Farming) की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।